बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

परेशानी या


परेशानी को सब अपनी पेशानी में लिखाकर लाते है परेशानी आज के वातावरण मे हर किसी को है । मै भी और आप भी सभी इसका शिकार होते है बात तो तब होती है जब आप की परेशानी मै केवल आप ही परेशान हों आप के अपने नहीं ।
यदि हम पुरानी बाते माने तो ईश्वर तक को परेशानियाँ आई है फिर हम तो मानव है और मेरा मानना है की मानव यदि खुद पर विश्वास करे तो खुदी को बदल देता है ।
परेशानी इसलिए नहीं आती की आप कमजोर बन जाये ,बल्कि आप के अभी तक के काम व् काम करने के तरीके मै कुछ कमियां होंगी जो आप को आगे बढ़ने से रोक सकती है ,आप काम करने के तरीके पर पुनः विचार करे व् काम को या आपने विचारों को नए तरीके से प्रस्तुत करे परेशानिया जरुर कम होगी यह मेरा अनुभव है ।
परन्तु कभी कभी सकारात्मक विचार वाला भी हताश हो जाता है तब ?
तब आपने विशवास के साथ उस ईश्वर पर विश्वास हमेशा बनाकर रखे देर से ही सही वह कुछ अच्छा तो हर किसी के साथ लिखता है हम अनजाने में ही कुछ एसा कर देते है जो परेशनियों को जन्म दे चूका होता है और हमें परेशानियों का सामना करना पडता है ।
और कुछ लोग जो महाभारत के कर्ण के समान किस्मत लिखा कर आते है वे जानते है की वे जो कर रहे है वह गलत है पर वे उसे छोड़ नहीं पाते हमेशा परेशान रहते है और जो सही के कर्ण होते है वे दानवीर हो जाते है और खुश रहते है ।
परेशानी मेरे खीचे इस फोटो के समान है जिसमे विषय तो दिख रहा है पर साफ नही ,सब कुछ मिला हुआ सा नजर आता है ,आँख गड़ाने पर भी कुछ साफ नहीं होता न ही आँख धोने पर फोटो साफ हो सकता है यही तो परेशानी है ।
परेशानी कभी भी परेशान होने से दूर नहीं होती
आप किसी भी कारण से परेशान हो कभी भी अपने दोस्तों के लिए अपने दरवाजे बंद न करे ।
परेशानी मे किसी से भी बात करने का मन नहीं होता है पर दुनिया बहुत बड़ी है कोइ न कोइ तो होगा ही जिससे आप बात करना चाहे या कोइ आप से बात करना चाहे उससे अपनी परेशानी जरूर बताये ,इधर -उधर की बातों से अच्छा है काम की बात करे ।
दुनियां में आप अकेले ही परेशान नहीं है और भी है आप और हम जेसे ।
परेशानी किसी को बताने से कम नहीं होती पर अकेले भी हल नहीं होती ....
परेशानी में मन की बात जरुर माने (जेसे यदि आप फ़िल्म ,गेम ,या घूमना ,नेट चेट,पेंटिग या कुछ भी एसा जो करने से आप को लगे की कुछ अच्छा हुआ या किया तो आप ने सही किया )
परेशानी में मन की बात पर उतना ही समय दे जिससे आप को समय की बर्बादी का अपराध बोध न हो
परेशानी कोइ भी हो उसका हल है जरूरत है ईमानदारी के साथ सकारात्मक प्रयास की
ब्लॉग की दुनिया परिवार से अनुरोध है की अपने परिवार को पर्याप्त समय दे अकेलापन परेशानी का सबसे बड़ा कारण हो सकता है
आज के लिए बस इतना कल फिर मिलेगे नए फोटो व् घटना व् विचारों के साथ मिलेगे शुभ रात्रि

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

आस्था


यह हमारे जबलपुर का बरेला का प्रसिद्ध माँ शारदा का मंदिर है । पहाड़ियों पर बसा यह माँ का घर अत्यंत आनंद दाईहै । माँ बच्चे के मन की बात बिना कहे ही समझ जाती है तो इन घंटियों में पन्नी बढ़ने का क्याऔचित्य है .............?
आपनी आस्था पर विस्वास करे अविश्वास की पट्टिया यहाँ -वहां बांधे

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

शादी (वीवाह)

इन दिनों मै अपनी छोटी बहन की शादी मै व्यस्त थी । इसी शादी मै मुझे बिहार जाना पड़ा ।
बिहार (पाटलिपुत्र )के दर्शन तो मै आप को बाद मै कराउंगी पहले शादी के बारे मै कुछ विचारों का आदानप्रदान हो जाये ।
मेरे विचार से शादी वह रिश्ता है जो दो परिवारों को जोड़ता है ।शादी महिला व् पुरुष के लिए सुरक्षा की अनुभूति है ।
शादी एक सुखद अहसास है
शादी वह रस्म है जिसके दुवारा दो व्यक्ति (महिला व् पुरुष )अगनी (तेज )को साक्षी मानकर आपने आप से वादा करते है की अब , अभी , से मै से हम बन गए है ।
शादी एक उत्सव हैजो आप के जीवन में उत्साह लाताहै ।
शादी वह ख़ुशी है जो आप को जिंदगी से और स्नेह करना सिखाती हैपरन्तु

मुझे बड़े दुख के साथ यह भी लिखना पड़ रहा है की शादी दुखों का अथाह सागर भी है
कारण

जीवन में बिना समायोजन के आप रह नहीं सकते परन्तु शादी पूरी तरह समायोजन पर टिकी होती है और समायोजन की पूरी कोशिश वह महिला करती है । एक महिला को माँ के गर्भ से ही सिखाया जाता है की वह कमजोर है उसे जीवन किसी सहारे के ही बिताना होगा यह सोच उसके वयस्क होते तक दीमाग मे बैट जाती है ।
महिला रिश्ते बनाती है और उसे सम्हालती भी है परन्तु न जाने कब ऐसा लगता है की वह रिश्ते को ढो रही है जबतक उसे इस बात का अहसास नहीं होता वह समायोजन की हर शर्तों पर सही साबित होती है परन्तु रिश्तों को ढोने का अहसास उसे कमजोर बना देता है वह हार जाती है समायोजन की सारी सरते एक - एक कर वह समाप्त करती जाती है और वही से आप की वैवाहिक जीवन में तनाव आने लगते है या कहे की सामने दिखने लगते है ।
वैवाहिक्जीवन जो एक सब्द है वह था में परिवर्तित हो जाता है और आगे वैवाहिक बस बचता है उसमे से जीवन अलग हो जाता है हर इन्सान के साथ ऐसा नहीं होता पर हर इन्सान के साथ कुछ तो जरूर होता है ।
शादी एक पर्व है उसे उत्साह व् उमंग के साथ मनाये यह मेरा आप सभी से आग्रह है ।
शादी मे जाते समय हमेशा याद रखे की आप को आप के घर जैसी व्यवस्था कुछ kara

शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

गुलाब दिवस पर सुभकामनाये(रोस डे )


आप सभी ब्लॉग की दुनिया पिर्वार वालो को सन्डे ब्लॉग को सहयोग व प्रोत्साइह्त करने के लिए में आभारी हूँ ।
कुछ अंतराल के बाद मै आप सभी को अपने अनुभव व फोटो भेज रही हूँ इसका मुझे खेद है पर मै अभी जबलपुर से बाहर गयी हुई थी ,व asi jagah गयी हुई थी ki chahkar भी ब्लॉग की दुनिया परिवार से संपर्क नहीं हो सकता था कारन बिजली का न होना अतः आप सभी से निवेदन है की बिजली का सदुअपयोग करे धन्यवाद ।

आप सभी को गुलाब दीवस पर बहुत बहुत शुभकामनाये
मै पहले ही बता चुकी हूँ की मुझे सभी फूल अच्छे लगते है ।फूल व बच्चे है जिन्हे देखकर मन प्रसन्न हो जाता है । सभी फूलों में कुछ विशेता होती है पर गुलाब मुझे बहुत अच्छे लगते है इसका कारन है इनके काटें ।
गुलाब की सुंदरता मै उसकी खुसबू , रंग , व बनावट के साथ ही उसके काटो का भी बराबर का योगदान मानती हूँ । काटे न होते तो गुलाब मेरा पसंदीदा फूल न होता काँटों की चुभन के बाद गुलाब की पंखुडियो के स्पर्श का अहसास रोमांस और रोमांच से भरपूर होता है
गुलाब यह भी बताता है की यदी आपके लब
गुलाब की पंखुरियो की तरह हैं तो आप अपनी मुस्कान के साथ उन कांटो की चुभन को सहने की हिम्मत रखते है क्योकी हर लब गुलाब की पंखुडियो की तरह नहीं होते

गुलाब वह फूल है जो कांटो मैं रहकर या कहे की कांटो के साथ ही खिलता है अपनी सुंदरता पूरी दुनिया मैं देता है
रोस डे पर आप सभी को बहुत-२ मुबारक आप सभी का जीवन गुलाब के फूल की तरह सुंदर व चुनोतियो पर विजय प्राप्त करता हुआ निरंतर प्रगतिशील
रहे
मिलते है वलिन्तिने डे पर कुछ अलग विचारो के साथ



गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

फूल और मै


आज मै आप से बहुत अंतराल के बाद मील रही हूँ , इसलिए फूलों के साथ आई हूँ ।
फूल मुझे सभी अच्छे लगते है

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

संक्रांति पर्व पर ब्लॉग की दुनिया वालों को शुभकामनाये





























आज संक्रांतिपर्व पर शुभकामनाये एवं आप सभी को हम संस्कारधानी वासियों की तरफ से संक्रांति मेले पर निमंत्रित करते है ।







मेले कुम्भ का आज प्रथम दिन था । मै आप सभी को अपने जबलपुर के नर्मदा घाटों के मेले के कुच्छ सजीव चित्रों व घटनाओं से अवगत करोंगी । मैंने ३३ वर्षों मै पहला मेला देखा है मुझे अच्छा लगा । किताबों में व फिल्मो में पढ़ा व देखा था पर सजीव नहीं देखा था आज यह संभव हो पाया । मै भीड़ से हमेशा दूर रहीहूं यही कारण था की मैंने आज तक कोई मेला नहीं देखा ,पर आज की भीड़ मुझे अच्छी लगी । आज चरितार्थ हो रहा था की धरम व ईश्वर का डर अभी जनमानस मै है (यह डर हमेशा बना रहे ) जबलपुर व विश्व ही ठंड व शीत लहर के प्रकोप को झेल रहा है इस कारण सूर्योदय के समय भीड़ थी पर कम । धीरे धीरे सूर्य के बढ़ते तापमान के साथ लोगों की भीड़ ने जन सैलाब का रूप ले लिया ।







आज नर्मदा के तट पर विशालजन सैलाब दिखाई दे रहा था । तकरीबन ४५ से ५० हजार तक लागों ने नर्मदा में नहाकर स्वर्ग में अपना स्थान निश्चित किया (शाश्त्रों के अनुसार ) और संक्रांति पर्व का आनन्द उठाया । प्रातः काल नर्मदा के जल से भाप निकल रही थी धुंध ने सम्पुर्ण नर्मदा के तटों को अपनी आगोश में ले रखा था । मै लेखक ,कविताकार नहीं हूँ इस कारण हो सकता है की मेरे शब्द सम्पुर्ण सोंदर्य को व्यक्त नहीं कर पारहे हों इस कारण मैने अपने कैमरे की मदद ली है ।







नर्मदा , कैमरा और मेरा भाई इस मेले में मेरे साथ रहे ।







मेले में जबलपुर की जनता ,शासन व पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय है । जगह जगह विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है , कुछ समितियों ने शरबत की व्यवस्था की है ,तकरीबन १००० पोलिस कर्मी लगे है ,महिला पोलिस कर्मी भी लगे है







रामपुर chauk से सड़क के दोनों तरफ तरह तरह के सामानों की दुकाने लगी हुई है इस मै आप को नहाने के लिए मग ,टावेल ,अंडरवियर ,आदि (यदि आप अचानक ही नर्मदा की तरफ निकल पड़े है तो कोई बात नहीं रस्तेमै आप को सब मिल जायेगा ) पूजा की सामग्री , बच्चो के खिलौने , सब्जी , घर ग्रहस्ती का पूरा सामान आप को मिल जायेगा ।







यदि आप को अपने किसी का नाम अपने हाथ पर गुदवाना है (गुदना गुदवाना या वर्त्तमान बीhasha में कहे तो टेटू , लिखवाना है तो इस की भी पूरी व्यवस्था है आज के लिए इतना ही ।







यह लिखते समय मुझे अपना प्राथमिक शाला का इम्तहान याद आ रहा है जब मै मेले पर निबंध को याद करके लिखती थी , osi समय से ही मेले का चित्रण मेरे बिमाग में बना हुआ था जिसे मेने आज सच पाया ।







आप सभी आमंत्रित है संस्कार धानी मै .......................

बुधवार, 13 जनवरी 2010

दोस्त या दुश्मन


दोस्त बनाने मै भी उतनी ही कठनाई होती है जीतनी की दुश्मन बनाने में और दोस्त उतनी ही सरलता से बन जाते है जीतनी सरलता से दुश्मन
तकलीफ या परेशानी ,मेहनत तो दोस्ती और दुश्मनी निंभाने में होती है

दोस्त से ज्यादा दुश्मन रखने चाहीये क्यों की दोस्त "कुछ" काम ईमानदारी से नहीं कर सकते और उनका यह व्यवहार तकलीफदायक होता है हम किसी भी तरह अपने आप को तसल्ली नहीं दे पाते ।
परन्तु
यही "कुछ" काम दुश्मन करे तो दील को तसल्ली दी जा सकती है यह कहकर की वह तो दुश्मन था उससे यही उम्मीद भी यही थी तो
दोस्त ज्यादा अच्छे है की दुसमन .....?
मेरा मन्ना है की
दोस्त और दुश्मन दोनों ही रिश्तों के नाम है और रिश्ते सभी अच्छे होते है बस उन्हें ईमानदारी से बनाने जीने की जरुरत है
तो आज हम फिर से रिश्तों के लिए ईमानदार होते हुएँ उन्हें जीना सीखे
आने वाले कल मै जिसतरह सूर्य आपनी दिशा बदलेगा उसी तरह सभी के रिश्तों मै सकारात्मक परिवर्तन आएगा मेरे साथ आप सभी भी यह प्राथना करे

मंगलवार, 12 जनवरी 2010

नर्मदा और बचपन

नर्मदा से मेरी पहचान
माँ के द्वारा हुई । माँ की खोज ने मुझे नर्मदा से मिला दिया और अब मिलाया है तो ऐसा की ,लगता है मेरी माँ मुझे मिल गई ।
आज नर्मदा के किनारे पर बैठ मै अपनी सांसों की लय को जब सुनती हूँ तो अपने मै शांति से परिपूणं शक्ति का अहसास पाती हूँ
नर्मदा वह नदी है जो अभी तक न जाने कितने लोगों के पाप को धो चुकी है पर मैली नहीं हुई राम की गंगा तो राजकपूर नेआज से कई साल पहले गन्दी कर दी थी पर नर्मदा के किनारे की संगेमरमर की चट्टानों पर नर्गिस की लाल साड़ी का रंग ही लग पाया ।
नर्मदा खुद को बचा लेगी यह मेरा मानना है पर ..........?
हमे नर्मदा को क्रोध करने पर विवश नहीं करना चाहिए । हम जबलपुर वासी व भारत वासी समय रहते सचेत हो जाये तो बहुत अच्छा होगा
इन बच्चों के लिए नर्मदा रोजगार का साधन है ,पेट की आग को बुझाने का एक जरिया है । ठंड हो या बरसात किसी भी मोसम में यह बच्चे और भी इनके भाएबंधू दीनदुनिया से बेखबर अपने काम का आनंद लेते हुए मिलेगे ।
तो आज मेरे इस चित्र के साथ हम सब एक प्रयास करे नर्मदा और बचपन बचने का ।
अगली पोस्ट में फिर मिलेगे नर्मदा के साथ ,बचपन के साथ ,अपनों के साथ ,परायों के साथ ,जीवो के साथ ,निर्जीवों के साथ और आपके साथ ।

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साया


मै जहाँ जहाँ चलूंगी मारा साया साथ होगा ।
मै जीधर को रुख करुँगी वो..................?

परछाई

मेरा समय अच्छा चल रहा है ।
कहते है की बुरे समय में परछाई भी साथ नहीं देती

रविवार, 3 जनवरी 2010